ज़िन्दगी के इस सफर में हमें कई तरह के किरदार निभाने पड़ते है जैसे की इंसान जब पैदा होता है तो एक बेटे का, जब थोड़ा बड़ा होता है तो छात्र/छात्र अर्थात शिष्य के रूप का, जब अपनी जवानी के दहलीज में कदम रखता है तो उसका विवाह होता है और वही एक पति बन जाता है इस प्रकार हमें जिंदगी में कई तरह के किरदारों के साथ जीना पड़ता है।
इस प्रकार जीते हैं हम
भूल जाते हैं दूसरों के गम
आज हम इस प्रकार जी रहे है आज अपने कपड़ो को तरह तरह के इतरो से महका रहें है किन्तु अपने आप को इस काबिल बनना नहीं सिख रहे है जिसमे समाज मानव समाज का हित हो इत्र की भांति हमारी एक महकती हुई छवि दुनिया के सामने आये।
इस प्रकार जीते हैं हम
भूल जाते हैं दूसरों के गम
आज हम इस प्रकार जी रहे है आज अपने कपड़ो को तरह तरह के इतरो से महका रहें है किन्तु अपने आप को इस काबिल बनना नहीं सिख रहे है जिसमे समाज मानव समाज का हित हो इत्र की भांति हमारी एक महकती हुई छवि दुनिया के सामने आये।
Zindagi zaroorto ke hisaab se guzaarni chahiye ... na ki khwaisho ke hisaab se ... kyun ki zaroortein saala fakir ki bhi poori ho jaati ... magar khwaishein badshaho ki bhi adhoori reh jaati hai

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